टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया को अमेरिकी कंपनी से मिल सकती है राहत

Updated on 03-11-2025 01:32 PM
नई दिल्ली: घाटे में चल रही वोडाफोन आइडिया (Vi) को अमेरिकी कंपनी का सहारा मिल सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार अमेरिकी निवेश फर्म टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स (TGH) वोडाफोन आइडिया में 4 से 6 अरब डॉलर (लगभग 35,488 से 53,232 करोड़ रुपये) का निवेश करने की सोच रही है। इतना ही नहीं, यह कंपनी इस घाटे में चल रही टेलीकॉम कंपनी का मालिकाना हक भी अपने हाथ में ले सकती है।

हालांकि, यह बड़ा निवेश तभी होगा जब भारत सरकार वोडाफोन आइडिया की सभी देनदारियों को निपटाने के लिए एक ठोस पैकेज देगी। इसमें एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) और स्पेक्ट्रम भुगतान से जुड़े सभी बकाया शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर यह डील फाइनल होती है तो TGH कंपनी के प्रमोटर बन जाएंगे और मौजूदा प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप और यूके की वोडाफोन से नियंत्रण ले लेंगे। अभी इस टेलीकॉम कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक भारत सरकार है। भारत सरकार के पास करीब 49% हिस्सेदारी है। अगर वोडाफोन आइडिया और TGH के बीच डील हो जाती है तो भारत सरकार का भी इस पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। हालांकि सरकार एक छोटी और निष्क्रिय निवेशक बनी रहेगी।

माफ नहीं होगी बकाया राशि

टीजीएच बकाया राशि को माफ करने की मांग नहीं कर रही है। बल्कि, वे इन देनदारियों को इस तरह से पुनर्गठित (restructure) करना चाहते हैं जिससे कंपनी को कुछ राहत मिल सके। इस संबंध में उन्होंने सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव भी सौंपा है। एक सूत्र ने बताया कि टीजीएच का प्रस्ताव बकाया राशि के समाधान के साथ ही आएगा। यह फर्म जिस पुनर्गठन पैकेज की मांग कर रही है, वह उनके निवेश और उनका निवेश सरकार द्वारा दिए जाने वाले राहत पैकेज पर निर्भर करेगा। अगर सरकार वोडाफोन आइडिया को राहत पैकेज देने का फैसला करती है, तो यह डील आने वाले महीनों में पूरी हो सकती है।

पहले भी कारनामा कर चुकी है टीजीएच

टीजीएच मुख्य रूप से डिजिटल और ऊर्जा परिवर्तन जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में निवेश करती है। उनके पास एक टेलीकॉम ऑपरेटर को चलाने के लिए जरूरी विशेषज्ञता और अनुभव है। इसके चेयरमैन और सीईओ संजीव आहूजा को 2003-2007 के दौरान फ्रेंच टेलीकॉम दिग्गज ऑरेंज को उबारने का श्रेय दिया जाता है। टीजीएच की पहले से ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे फाइबर और टावर संपत्ति) में कई देशों में हिस्सेदारी है।

18 महीने तक चली थी बातचीत

टीजीएच ने पहले भी वोडाफोन आइडिया में निवेश को लेकर लगभग 18 महीनों तक बातचीत की थी। लेकिन जब पिछले साल Vi ने संस्थागत निवेशकों को शेयर बेचकर फंड जुटाने का फैसला किया, तो यह फर्म पीछे हट गई थी क्योंकि उन्हें लगा कि यह उनके लिए अच्छा सौदा नहीं है। सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में यह बातचीत फिर से तेज हो गई है।

नहीं सुधरी Vi के हालत

पिछले साल Vi ने फॉलो-ऑन और प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए 24,000 करोड़ रुपये जुटाए थे, लेकिन यह फंड जुटाने के बावजूद कंपनी की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। कंपनी अपनी योजना के अनुसार 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज भी नहीं जुटा पाई है।
इस वित्तीय वर्ष के अंत तक Vi को एक बड़े सहारे की जरूरत है, क्योंकि तब उसे AGR से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के वैधानिक बकायों का भुगतान शुरू करना होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते Vi को कुछ राहत दी है, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह आदेश सभी AGR बकायों पर लागू होता है या सिर्फ लगभग 9,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग पर।

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